युवा कवि नितिन फलटणकर की रचना-रास्ते
:-नितिन फलटणकरमैं उजाला बन चला था,रास्तों को नापने।आह! अचानक आंधी आई।मैं बुझ गया गुमनाम बनकर।लोग ढूँढते रहते मुझे, मैं उनका साया बन गया।और बस वो चल दिए, फिर खुला आसमान बनकर।यह मुझे मालूम न था,के जिंदगी अपनी नहीं।मैं तो आंधी से लड़ रहा था,मामूली इन्सान...
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Kulwant Happy
अतिथि कोना
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[21 May 2010 20:32 PM]



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