प्यार पर कविता भाग ग्यारह

सरल कुमार मुझे पता नहीं वो इन कविताओ का अर्थ समझती भी थी या नहीं , पढ़ती थी भी या नहीं , या सिर्फ मेरा दिल रखने के लिए झूठी बड़ाई " वाह वाह " के रूप में कर देती थी । अगर सच में इनके बीच में छुपे अर्थ उसे समझ में आते तो शायद रातो की नींद उड़ जाती और मुझसे एक एक पंक्ति... [पूरी पोस्ट]
writer Virender Rawal
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[21 May 2010 20:22 PM]

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