जरूरी नहीं मुस्लमान फतवे को स्वीकारें
मजहबी ठेकेदार समाज पर अपनी पकड़ मजबूत बनाने के लिए अपने धार्मिक अधिकारों का दुरुपयोग करते आ रहे हैं। वह नहीं चाहते कि लोग पढ़ें, लिखें, उनका विवेक जाग्रत हो। अगर लोग पढ़-लिखकर ज्ञानवान और विवकेशील बन जाएंगे तो इन कथित गुरुओं, पंडितों और मुल्लाओं की दुकानें...
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Dr M.S. Parihar
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[21 May 2010 20:32 PM]



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