परम नहीं, ईश्वर आया मेरे घर
‘काकू! देखो, फोन बन्द मत करना। मेरी पूरी बात सुनना। तीस सालों से आप मुझसे कन्नी काट रहे हो। मुझे टाल रहे हो। मेरे खिलाफ भले ही कुछ नहीं कहते हो किन्तु मेरा नाम सुनना, मेरी बात करना पसन्द नहीं करते हो। लेकिन आज मैं बिलकुल वैसा हो गया हूँ जैसा आपने तीस साल...
[पूरी पोस्ट]
विष्णु बैरागी
जीवन का इन्द्रधनुष
16
4
0
4
3
[21 May 2010 20:30 PM]



Shuffle








