एक मोड़
न जाने कितनी बारमुड़ मुड़ के रुक रुक केफिर उस मोड़ पे लौटकर गया हूँजिस मोड़ पे तुम मेरा हाथ छुड़ाकर चली गयी थीन जाने कितनी बारउस एक एक राह से गुजरा हूँजिन पर तुम और मैं साथ चली थेन कितनी ही बारउस मोड़ पे घंटो रुक कर तुम्हारा इंतज़ार किया...
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tarun
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[21 May 2010 18:16 PM]



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