तेरा ख़त

Tarun's World एक वो भी दिन थाजब तेरे ख़त के आने किखबर से ही महक उठते थेदिन रात मेरेऔर एक यह दिन हैतेरा ख़त सामने मेज़ पे पड़ा हैऔर उसे खोलकर पड़ने की हिम्मत नहीं होती ...-तरुण... [पूरी पोस्ट]
writer tarun
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[21 May 2010 18:18 PM]

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