कबाड़ी के कबाड़ से निकला यादों का पुलिंदा

गाने-साने पटना की गलियों फिर से पहूंच गया लगता हूँ जैसे.. जब मैंने इन गीतों को पहली बार सुना था उस समय मैं तुरंत ही मैट्रिक पास किया था.. कैसेट खरीदने का जिम्मा भैया के हाथों में होता था.. भैया मुझसे बस दो साल बड़े हैं, मगर उस छोटी उम्र में भी ना जाने कहां से... [पूरी पोस्ट]
writer PD

Hindi

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[21 May 2010 15:53 PM]

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