एक नन्हीं सी बेटी बड़ी हो गई
नमस्कार मित्रों! मैं मनोज कुमार एक बार फिर चिट्ठा चर्चा के साथ हाज़िर हूं। अदत से लाचार हूं। चर्चियाने से पहले बतियाने की आदत सी पड़ गई है। हमें लगता है हमें ऐसा समाज बनाना चाहिए जिसमें जाति, जातिसूचक शब्द, संकेत, प्रतीक भाव, आंतरिक संस्कार आदि का सर्वथा...
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मनोज कुमार
मनोज कुमार
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[21 May 2010 15:13 PM]



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