हो सके तो...एक दिवंगत साथी की जीवंत कविताएं....
आज एक ऐसे साथी की दो कविताएं पढ़वाना चाहते हैं जो कल हम सबको अलविदा कह गया....कविताएं छोटी हैं पर बेहद संवेदनशील हैं, पहले कविता पढ़ें फिर कवि का परिचय भी..... हो सके तो...मेरी रंगीन कब्र पर दीप मत जलाना हो सके तो जीते जी मेरे अंधेरे घर में उजाला कर...
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मयंक
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[21 May 2010 13:24 PM]



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