लुटेरे

रतन चंद 'रत्नेश' लुटेरे   हम दोनों ने अपनी-अपनी पत्नियों और बच्चों को होटल में ही रहने दिया और समुद्र के किनारे आ गए। दूर-दूर तक फैला समुद्र का अनंत विस्तार। शहर की भागदौड़ भरी व्यस्त दुनिया से जुदा यह सुकून की दुनिया थी और पिछले एक सप्ताह से हम यहां के एक होटल में... [पूरी पोस्ट]
writer रतन चंद रत्नेश
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[21 May 2010 10:35 AM]

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