माँ के ख़यालात में....(कुंवर जी)
हँसता-गाता,खेलता-खाता,रोता-नहाता,रूठता-मनाता भी मै शायद अधुरा ही होता हूँ!आंसुओ के अहातो मेंदुखो के अखाड़ो में,मुश्किलों के पहाडो में अपनों के मेलो मेंपरायो के झमेलों में,भी शायद मै अधूरा ही होता हूँ!माँ के ख़यालात में,और जब कलम होती है हाथ में तो ही मै...
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kunwarji's
अगर मै कहूं......
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[21 May 2010 09:42 AM]



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