खोटा सिक्का

कस्बे का कवि... एक दिन मित्रों ने घोषित कर दियाईश्वर को खोटा सिक्कादूसरे ही दिनदुश्मनों नेउसे बाजार में चला दियाघूमता रहा सिक्का बाज़ार मेंऔर फिर लौटा एक दिनमित्रों के पासबदरंग और घिसा-पिटाएकदम खोटे सिक्के की तरह... [पूरी पोस्ट]
writer मणिमोहन
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[21 May 2010 08:37 AM]

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