नमक स्वादानुसार.......(एक और लघुकथा..)
आसमान मे टिमटिमाते तारे, वो उधार की रोशनी से चमकता चाँद भी वो रोशनी नही दे पा रहे थे, जो केरोसीन भरी एक शीशी मे लटकी बाती जल जलकर उस छोटे से खंडहर को दे रही थी...पन्नी से ढकी छत... हवाओं के थपेड़ों से उनकी फट फट की आवाज़....पर कोने मे सजी ईंटों का बोझ और...
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दिलीप
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[21 May 2010 05:18 AM]



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