इसे मैं शीर्षक नहीं दे पाया
(समीर जी के लेख "मैं कृष्ण होना चाहता हूं" से प्रेरित हो कर) छायाचित्र साभार: समीर जी के लेख सेhttp://udantashtari.blogspot.com/2010/05/blog-post_17.htmlहर एक में कहींभीतर ही होता है कृष्णऔर होता हैएक निरंतर महाभारतभीतर ही भीतर,क्यों ढूढते है हम...
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रौशन जसवाल विक्षिप्त
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[21 May 2010 05:02 AM]



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