तुम , मैं , और कविता

शब्द और अर्थ तुम , मैं , और कविता यह कैसा रिश्ता ?हमारे बीच गुजरे मौन के पल ,या गरमा गरम संवाद ,पत्रों का लेनदेन ,या चौपाटी की साँझे की भेल,नहीं यह सब नहीं कविता  . मैं , मै था ,तुम, तुम थी ,अनायास और बेवजह थी कविता .एक हँसता हुआ चेहरा ,एक दर्द भरी हंसी ,एक... [पूरी पोस्ट]
writer अतुल प्रकाश त्रिवेदी/ અતુલ પ્રકાશ ત્રિવેદી
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[21 May 2010 04:44 AM]

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