इस लालू की तो मा........

कहासुनी नक्सलियों ने एक बस उड़ा दी. दर्ज़नों आम आदमी मारे गए, लेकिन अपनी मर्सडीज़ से उतरकर किसी आलीशान बंगले के सजे संवरे ड्राइंग रूम में गद्देदार सोफे पर धंसकर महंगी शराब की चुस्कियों के बीच बेचारे गरीबों की दशा पर रोने वाले वामपंथी कुछ नहीं बोले. दीगर है कि इस... [पूरी पोस्ट]
writer ऋषभ कृष्ण
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[21 May 2010 04:29 AM]

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