नौकरी (लघुकथा - सुलभ)

यादों का इन्द्रजाल... Hindi Poetry by Sulabh "अंकल आ गए... अंकल आ गए... " घर पहुँचते ही पांच वर्षीय भतीजा सोनू ख़ुशी से चहक उठा. सोनू के प्यारे अंकल रमन ने भी सोनू को गोद में उठाकर अपने कमरे में ले आए और पुचकारते हुए कहा "हाँ ! तुम्हारे अंकल आ गए और तुम्हारे लिए एक खिलौना लाये हैं... ये देखो... [पूरी पोस्ट]
writer सुलभ § सतरंगी
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[21 May 2010 04:15 AM]

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