घर जब आती बेटियां

सीधी खरी बात.. ख़्वाब अधूरे पूरे होते, मन में गीत नए फिर आते !दिल में क़सक कहीं फिर उठती, घर जब आती बेटियां !!नन्हें क़दमों से फिर चलकर, छोटी झाड़ू हाथ में लेकर !दो चोटी कर पायल पहने, घर जब आती बेटियां !! दुखती माँ की पीठ हमेशा, छोटे हाथों खूब दबाकर ! गुड़ियों को फिर आज... [पूरी पोस्ट]
writer डा०आशुतोष शुक्ल

कविता

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[21 May 2010 02:31 AM]

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