अगर तुम्हें नींद नहीं आ रही

कबाड़खाना चन्द्रकान्त देवताले जी को आप कबाड़ख़ाने पर पहले भी कई बार पढ़ चुके हैं. उनकी प्रमुख कृतियों में लकड़बग्घा हँस रहा है (१९७०), हड्डियों में छिपा ज्वर(१९७३), दीवारों पर ख़ून से (१९७५), रोशनी के मैदान की तरफ़ (१९८२), भूखण्ड तप रहा है (१९८२), आग हर चीज में... [पूरी पोस्ट]
writer Ashok Pande
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[21 May 2010 01:15 AM]

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