“कर देंगे गुलशन वीराना” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)
किया बहुत था प्यार हमेशा हमने सौतेलों को, किन्तु उन्होंने हमको भाई नहीं माना! -- लाड़-चाव से हाथ थाम कर चलना जिन्हें सिखाया था, जीवन में आगे बढ़ने का पथ जिनको दिखलाया था, हमने उन्हें अनुज माना था, किन्तु...
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डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
गीत
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[21 May 2010 00:43 AM]



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