कविता :बिजली
बिजलीसुनो यारो देखो यारो ।हर गाँव में हर शहर में ॥ रहते हैं हजारो गाँव अँधेरे में । अगर बिजली को पाना हैं ॥यह बात बिजली कर्मचारी को बताना हैं । की पैसा तो बहुत लेते हो ॥फिर बिजली क्यों नहीं देते हो । सुनो यारो देखो यारो ॥हर गाँव में हर शहर में ।रहते हैं...
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BAL SAJAG
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[20 May 2010 23:23 PM]



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