मेरा होना या न होना
आज पढिये मुक्ति कि कविता मेरा होना या न होना मैं तभी भली थीजब नहीं था मालूम मुझेकि मेरे होने सेकुछ फर्क पड़ता है दुनिया कोकि मेरा होना, नहीं हैसिर्फ औरों के लिएअपने लिए भी है.मैं जी रही थीअपने कड़वे अतीत,कुछ सुन्दर यादों,कुछ लिजलिजे अनुभवों के साथचल रही...
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[20 May 2010 23:21 PM]



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