जौन एलिआ की याद में उन्ही की एक गज़ल
जौन एलिआ को सुन कर एहसास हुआ, जो मीर और मिर्ज़ा से ले कर तमाम नाकाबिले-इंदिराज़ कह गए वो नासिर्फ़ नाकाफ़ी था बल्कि कई बरसों ऐसा कितना कुछ वो सुन कर हम वाह-वाह किया किये जो दर-अस्ल नाकाबिले-दाद था!...
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eswami
ग़ज़ल
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[20 May 2010 23:16 PM]



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