स्वप्न आते रहे
चाँद तारे दीवाली मनाते रहे,रात जगती रही स्वप्न आते रहे ! चंद्रिका ने दिया आँसुओं को लुटा,उनको ऊषा ने निज माँग में भर लिया,पुष्प झरते रहे, वृक्ष लुटते रहे,भ्रमर आते रहे, गुनगुनाते रहे ! चाँद तारे दीवाली मनाते रहे,रात जगती रही, स्वप्न आते रहे ! छोड़ हिम को...
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Sadhana Vaid
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[20 May 2010 22:51 PM]



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