टिप्पणी पांच दिखती है एक, बहुत नाइंसाफी है ये...
हमारी कल की पोस्ट मूछों वाला ब्लागर लापता में एक समय जब पांच टिप्पणियां आईं थी, तब ब्लागवाणी में तो ये पांच दिख रही थी, लेकिन राजतंत्र को खोलने पर एक ही टिप्पणी नजर आ रही थी। पांच टिप्पणी चिट्ठा जगत में भी नजर आ रही थी। आखिर ये कैसा गोल-माल होता है समझ...
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राजकुमार ग्वालानी
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[20 May 2010 22:15 PM]



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