ऎ बहुरिया साँस लऽ, ढेंका छोड़ि दऽ जाँत लऽ
आज गिरिजेश भैया ने अपनी पोस्ट से गाँव की याद दिला दी। गाँव को याद तो हम हमेशा करते रहते हैं लेकिन आज वो दिन याद आये जब हम गर्मी की छुट्टियों में वहाँ बचपन बिताया करते थे। अपनी ताजी पोस्ट में उन्होंने पुरानी दुपहरी के कुछ बिम्ब उकेरे हैं। एक बिम्ब...
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सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
यादें
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[20 May 2010 19:30 PM]



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