श्लीलता और अश्लीलता

सद्भावना दर्पण श्लीलता और अश्लीलता पर समाज में सदियों से बहसें चलती रही है, उस वक़्त भी जब किसी महिला की नग्न मूर्ती बनाई गयी और उसे कला का नाम दिया गया था. मतलब यह कि हर काल में दो धराये बहती रहती है. आज भी यही हो रहा है. हम प्रगतिशीलता की, खुलेपन की बाते करते है, और... [पूरी पोस्ट]
writer girish pankaj

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[31 Jan 2010 13:28 PM]

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