लज्जा : नारी का अभेद्य कवच

दर्शन-प्राशन यदि लज्जा ही निर्लज्ज होकर घूमेगी घर के आँगन में. तो स्वयं नयन की मर्यादा भागेगी छिपने कानन में. यदि लज्जा ही मुख चूमन को लिपटेगी अपनी काया से. तो कैसे आकर्षित होंगे 'चख'ह्री की श्रीयुत माया से. यदि लज्जा ही अवगुंठन की आलोचक बन जाए भारी. तो कौन... [पूरी पोस्ट]
writer Pratul

लजा

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[20 May 2010 15:28 PM]

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