संजोया सपना

बावरा मन अकसर ऐसा होता है कि सपने टूट जाया करते हैं पर इंसान जज़्बाती है ना.............. फिर से नई आस के साथ सपने बुनने लगता है टूटता है, बिखरता है पर सपने संजोना बन्द नहीं करता.............बस सपनों को हकीकत में बदलते देखना चाहता है............ [पूरी पोस्ट]
writer सुमन'मीत'
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[20 May 2010 15:43 PM]

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