आज की रात जीना चाहता हूँ

साहित्य-सहवास आज की रात जीना चाहता हूँआबे - हयात पीना चाहता हूँइससे पहलेकि मैं तुम्हारे हुस्न के झूले में झूल जाऊंइससे पहलेकि मैं अपने मुर्शिद की दरगाह भूल जाऊंहटालो निगाह मुझसे.................ज़ख्म पहले ही बहुत गहरे है ज़िन्दगानी मेंआज एक घाव सीना चाहता हूँआज की रात... [पूरी पोस्ट]
writer AlbelaKhatri.com
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[20 May 2010 14:26 PM]

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