चूहे का वेश छोड़ना होगा-हिन्दी शायरी (choohe ka vesh-hindi shayri)

दीपक भारतदीप की शब्द प्रकाश-पत्रिका हाथ जलने के डर सेदियासलाई नहीं जलायेंगेतो फिर रौशनी भी नहीं पायेंगे।चूहों की तरह अंधेरे में छिपने की आदत हो गयी तोहर जगह बिल्लियों के आंतक तलेअपना जीवन बितायेंगे।कभी न कभी तो लड़ना होगा,चूहे का वेश छोड़ इंसान बनना होगाआग जलने दो अनाचार के खिलाफवह ताकतवार... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

masti

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[20 May 2010 13:38 PM]

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