अधूरी बातें…
- पता है, छोले बना रही हूँ! - हम्म....एक दिन वो तुम्हे बनायेंगे - तुम पागल हो चुके हो... - दुनिया भी यही समझती है - तो क्या मुझे इस दुनिया से परे मानते हो? - कुछ मान ही तो नहीं पाता - तुम्हारी आँखें कुछ ढूंढ रही है...? - हडप्पा… मोहनजोदडो… - वो क्या हैं?...
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Pankaj Upadhyay (पंकज उपाध्याय)
कुछ एं वें ही
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[20 May 2010 13:44 PM]



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