पुरानी दुपहरी के कुछ बिम्ब - टिकिर टिक्क टिक्क टिक्क

एक आलसी का चिठ्ठा गरमी की दुपहर की अपनी सुन्दरता होती है। आज मुझे एक गुजरा दौर याद आ गया। गाँव में तब संयुक्त परिवार थे और लोग डट कर खेती करते कराते थे। सिंचाई के लिए धनिक पट्टिदारों ने पक्की नालियों का जाल बनवाया था जो जमीन से उपर थीं। जहाँ रास्ते क्रॉस होते थे वहाँ... [पूरी पोस्ट]
writer गिरिजेश राव

साइफन

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[20 May 2010 12:38 PM]

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