तन्हाईयाँ
तुमसे अब दर्दे सुखन आबाद है,तुम नहीं हो तो तुम्हारी याद है। रात की तन्हाईयाँ कुछ इस तरहएक परिंदा और सौ सय्याद हैं।तुम्हारे बिन दुनिया अधूरी है मेरी,तुम अगर हो, ख़ुशी है हर आह्लाद है।हाँ मुझे मालूम है रस्मो- रिवाज रब का दर पर, तेरे घर के बाद...
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pawan dhiman
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[17 May 2010 16:23 PM]



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