हैती में भूकंप के बाद

prayaas चंद पलों का जलजला , और फिर ठहरावअनथक चीखेंउजड़े हुए गाँव। जीवन के लिए याचनारतआधी दबी देहकहीं शिशु की क्षत देह परक्रंदन रत नेह। कहीं घर से गृहणी छिनीकहीं बच्चो से बाप प्रभु यह कैसी लीलायह कैसा संताप?जीवन तुम्हारे लिए रंगमंच है परिहास है,पर हम कठपुतलियों... [पूरी पोस्ट]
writer pawan dhiman
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[10 May 2010 10:39 AM]

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