...महसूस किया है मैंने.

prayaas संजीदगी से जिन्दगी को जब जिया है मैंने,खुद को बेबस बड़ा, महसूस किया है मैंने. ताश के पत्तों सा देखा है ढहते महलों को,बस्तियों को मरघट होते देख लिया है मैंने. होश में चुभते हैं, दुनिया के कई तौर तरीके,चैन का जाम मदहोशी में ही पिया है मैंने.रौशनी... [पूरी पोस्ट]
writer pawan dhiman
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[17 May 2010 12:46 PM]

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