चलो किसी का दर्द बाँट लें....

prayaas रिश्ते नातों के जंगल मे,भटके हैं,लेकिन क्या पाये?चलो किसी का दर्द बाँट लें , चलो किसी को गले लगाएं ,बचपन का था खूब जमाना,कच्ची छत और बैल पुराना,मट्ठा,गुड और मकई की रोटी,और पैदल स्कूल को जाना,छूटे सारे संगी साथी,अपने थे जो हुए पराये,चलो किसी का दर्द... [पूरी पोस्ट]
writer pawan dhiman
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[17 May 2010 16:26 PM]

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