'फ़ुर्र'

prayaas शुक्रवार की देर रात मै दिल्ली से घर लौटा । सुबह बरामदे मे इधर उधर पड़े तिनको और रोशनदान मे निर्माणाधीन घोंसले ने बरबस ही ध्यान खींचा । दूसरे कोने पर बैठी एक चिड़िया माहोल का जायजा ले रही थी। संभवत: हमारी प्रतिक्रिया के प्रति वह आशंकित थी। मैंने तिनके... [पूरी पोस्ट]
writer pawan dhiman
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[19 May 2010 17:43 PM]

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