वाह !! मर्दानगी...जिंदाबाद....

काव्य मंजूषा जानते हो !!वह घोषित चरित्रहीन है, क्योंकि : वो किसी को अपने पास फटकने नहीं देती, ईट का जवाब पत्थर से देती, तुम्हें आईना दिखा देती है,हर बार तुम हार जाते हो,अपनी ही नज़र में गिर जाते हो,फिर ऊपर उठने की जुगत लगाते हो,उसके नाम पर चढ़कर तुम; ऊपर पहुँच... [पूरी पोस्ट]
writer 'अदा'
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[20 May 2010 11:10 AM]

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