लोग झुक जाते हैं वैसे तो सभी के आगे
लोग झुक जाते हैं वैसे तो सभी के आगे।सर झुकाया न कभी हमने किसी के आगे॥देख कर आंखों से भी कुछ नहीं कहता कोई,लब सिले रहते हैं क्यों आज बदी के आगे॥ग़म ज़माने का है जैसा भी हमें है मंज़ूर,हाथ फैलाएंगे हरगिज़ न ख़ुशी के आगे॥माँगने वाले हुआ करते हैं बेहद...
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युग-विमर्श
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[20 May 2010 10:47 AM]



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