मेरा होना या न होना

feminist poems मैं तभी भली थीजब नहीं था मालूम मुझेकि मेरे होने सेकुछ फर्क पड़ता है दुनिया कोकि मेरा होना, नहीं हैसिर्फ औरों के लिएअपने लिए भी है.मैं जी रही थीअपने कड़वे अतीत,कुछ सुन्दर यादों,कुछ लिजलिजे अनुभवों के साथचल रही थीसदियों से मेरे लिए बनायी गयी राह परबस चल... [पूरी पोस्ट]
writer mukti
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[20 May 2010 10:54 AM]

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