युवा कवि नितिन फलटणकर की "त्रिशूल"

युवा सोच युवा ख्यालात त्रिशूल-नितिन फलटणकर ऑंख में भूख थी, और हाथ में बंदूक थी।साथ उसके विनाश था, और कांपती किसी की रूह थी।वो लड़ रहा था, अपने आपसे।न्याय के वासते।न्याय की छांव भी धूप से तेज थी।छोड़ आया था वह खून के रिश्ते।खून के लिए उसके हाथ में मौत थी। उसे न पता था, वह कर रहा... [पूरी पोस्ट]
writer Kulwant Happy

अतिथि कोना

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[20 May 2010 09:51 AM]

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