मुलाकातों का इंतज़ार
जाने कहां बिछड़ गए वो दिन, जब दिल में एक तमन्ना होती था, किसी से मिलने को बेताब रहता था, चंद पलों के दीदार से खुशियों की रौनक होती थी, और होती थी हरएक बात उनकी, बातें अब भी बाकी हैं, मुलाकातों का इंतजार अब भी है, पर ना अब वो हैं, ना ही वह वक्त। उनकी...
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चन्दन कुमार
फुटकर कवितायेँ
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[20 May 2010 09:18 AM]



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