राजनीति में भी 'लेटरल एंट्री' वालों की शामत
हमारे देश की हर व्यवस्था ढर्रेवादी है। कोई कितना भी एक्सपर्ट हो, उसका बीच में कूदना व्यवस्था को पचता नही है। जयराम रमेश मुश्किल में आये, शशि थरूर को तो जाना ही पडा। नौकरशाही हो या राजनीति, सब जगह 'लेटरल एंट्री' वालों को अस्वीकार ही किया जाता है।बरसों से...
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WindEnergyMan
will there be any change?
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[20 May 2010 07:52 AM]



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