आह.. चाँद ......!
ख्व्वाबों केतारों केबीचएकतम्मना साचमकता चाँद..तारों कीकटोरियोंके बीचरोटी सारखा चाँद..अरसे बादतेरा आनाऔर यूँमुस्कुरानाजैसेदिखा होईदका चाँद ...खुलेआसमान के तलेपथरीलीधरती पर पड़ेछोटे सेघर कीछत सादिखा चाँद ..आँखें बंद करजब तुझेमहसूस कियाचांदनी साशीतलथा...
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sangeeta swarup
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[20 May 2010 08:33 AM]



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