“तितली रानी” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)
तितली रानी, तितली रानी! तुमने क्या है मन में ठानी!! उड़कर दूर देश से आई! लगता है लग गई थकाई!! सुस्ताने को हाथ मिला है! मुझे तुम्हारा साथ मिला है!! तुम रंगों का भरा समन्दर! पंख तुम्हारे लगते सुन्दर!! चलो तुम्हें मैं ले जाता हूँ! थोड़ा पानी पिलवाता हूँ!!...
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डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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[20 May 2010 08:49 AM]



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