नियति की ये अबूझ पहेली..............

धर्म यात्रा जीवन पथ पर चलते चलते एक समय ऎसा भी आता है जब प्रत्येक व्यक्ति को ये सत्य स्वीकार करना ही पडता है कि नियति कि धूर्त आँखे हमारी हर दुर्बलता को बहुत अच्छे से पहचानती हैं। जब वे देखती हैं कि हमने अपने मन को इस अपूर्ण संसार के भी अनुकूल ढाल लिया है,तो हमें... [पूरी पोस्ट]
writer पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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[20 May 2010 07:05 AM]

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