समाधि से भोग का मार्ग
भारतीय संस्कृति त्याग की संस्कृति रही है। ईशावास्य उपनिषद् का सूत्र वाक्य ही है - तेन त्यक्तेन भुज्जीथा मा गृध: कस्यस्विद् धनम। त्रेता, द्वापर में यह संस्कृति बरकरार रही। कलियुग में रजनीश ओशो आते हैं और एक किताब लिखते हैं संभोग से समाधि की ओर...। किताब...
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सुभाष चन्द्र
बाज़ार और संत
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[20 May 2010 06:55 AM]



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