समाधि से भोग का मार्ग

देख कबीरा भारतीय संस्कृति त्याग की संस्कृति रही है। ईशावास्य उपनिषद् का सूत्र वाक्य ही है - तेन त्यक्तेन भुज्जीथा मा गृध: कस्यस्विद् धनम। त्रेता, द्वापर में यह संस्कृति बरकरार रही। कलियुग में रजनीश ओशो आते हैं और एक किताब लिखते हैं संभोग से समाधि की ओर...। किताब... [पूरी पोस्ट]
writer सुभाष चन्द्र

बाज़ार और संत

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[20 May 2010 06:55 AM]

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