ऐ चंदा! तू मेरे बड़ा काम आया…...

दिल की कलम से... बचपन का जब मेरे सूना था आँगन...खिलौने के सपनों मे खोया हुआ मन...तभी माँ ने चुपके से तुझको दिखाया...दिखाया था तुझमे वो बुढ़िया का साया...तुझे देख कर ही था बचपन गुज़ारा...ऐ चंदा! तू मेरे बड़ा काम आया...जवानी मे जब जेब खाली पड़ी थी...यूँ कूड़े मे मन के... [पूरी पोस्ट]
writer दिलीप
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[20 May 2010 05:12 AM]

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