माहिये

गीत सुनहरे 16. साजन घर आये हैं पी जो मिले मुझको सुध बुध बिसराए हैं 17. दीदार हुए रब के अब है किसे पाना बलिहार गया सद के18. तेरा मुझसे नाता दर्द का है रिश्ता संग आँसू बहा जाता19. फूलों पर हैं भंवरे चाह रहे पीना मधु रस सब हंस हंस के20. खामोश हैं दिलबर क्यों राज है... [पूरी पोस्ट]
writer Kavi Kulwant

माहिये- 2

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[20 May 2010 05:00 AM]

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